सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ने को लेकर सरकार को एक चिट्ठी लिखी है। बुधवार को लिखे इस पत्र में उन्होंने साफ शर्तें रख दी हैं।

यह पत्र उन्होंने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को लिखा है। दोनों नेता मंगलवार देर रात मेदांता अस्पताल पहुंचे थे और उनसे अनशन खत्म करने की अपील की थी। वांगचुक इस वक्त अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं।

वांगचुक ने पत्र में लिखा, “कल रात अस्पताल में मुझसे मिलने आने और मेरा अनशन खत्म करने की अपील करने के लिए आपका धन्यवाद। हमारी बातचीत के दौरान आपने मुझे भरोसा दिलाया कि सरकार निम्नलिखित मुद्दों पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी।”

उन्होंने दो मुख्य मांगें रखीं। पहली, परीक्षा पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले करीब 20 छात्रों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए। दूसरी, जवाबदेही तय करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा हो, जिसमें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार भी शामिल हो।

पत्र में एक और अहम मांग है। वांगचुक ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ किसी कार्रवाई को न रोकने की भी शर्त रखी।

शर्त पूरी न होने पर क्या

वांगचुक ने पत्र में आगे लिखा, “अगर सरकार ऐसा आश्वासन देती है, तो मैं इस विश्वास के साथ अपना अनशन समाप्त कर दूंगा कि सरकार ने न सिर्फ मेरी अपील सुनी है, बल्कि लाखों युवा भारतीयों की आकांक्षाओं को भी समझा है।”

उन्होंने चेतावनी भी दी। उनके मुताबिक, अगर आश्वासन नहीं मिला तो उन्हें अनशन अनिश्चितकाल तक जारी रखने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस बल का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल दोबारा नहीं होगा।

वांगचुक ने छात्रों से भी अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार से आश्वासन मिलने के बाद वे शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे छात्रों से भी आंदोलन रोकने और बातचीत शुरू करने की अपील करेंगे।

सीजेपी ने रखे बातचीत के दो विकल्प

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने बुधवार को मीडिया से बात करते हुए बताया कि सरकार से आज सुबह भी बातचीत का प्रस्ताव आया था। उन्होंने बताया कि पार्टी ने सरकार के सामने दो विकल्प रखे हैं।

सौरव दास ने कहा, “हमने सरकार के सामने दो विकल्प रखे हैं। हमने उनसे कहा है कि या तो वो जंतर-मंतर आ जाएं, या फिर जंतर-मंतर के पास किसी निष्पक्ष स्थान पर बातचीत हो सकती है।”

सरकार ने पहले दावा किया था कि 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों की ओर से बातचीत का प्रस्ताव आया था। सौरव दास ने इस दावे को खारिज किया।

उन्होंने कहा, “उन्होंने (सरकार ने) 20 जुलाई को भी हमसे संपर्क किया था। वे जो यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने हमसे संपर्क नहीं किया, वह पूरी तरह गलत है। वो सुबह से ही हमसे लगातार संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके वीडियो भी मौजूद हैं, जिनमें पुलिस हमें सरकार से बातचीत करने के लिए कह रही है।”

सौरव दास ने आगे बताया, “आज भी पुलिस हमारे पास आई और कहा कि सरकार बातचीत करना चाहती है। हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन तभी जब सरकार खुले मन से हमारी बात सुने, प्रदर्शनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करे और उन्हें स्वीकार करने की इच्छा रखे।”