तमिलनाडु विधानसभा चुनाव नतीजों के 110 दिनों बाद डीएमके (DMK) के अध्यक्ष एमके स्टालिन ने पार्टी की चुनावी हार पर खुलकर अपनी बात रखी है। चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय ‘अन्ना अरिवलयम’ में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री ने हार के कारणों का विस्तृत विश्लेषण किया। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक-दूसरे पर दोष मढ़ने से कोई समाधान नहीं निकलेगा। इसके बजाय उन्होंने पार्टी के सभी विंग्स को अपनी कमियां पहचानकर नए सिरे से संगठन को मजबूत करने का निर्देश दिया।
सोशल मीडिया को कम आंकना पड़ा भारी
पार्टी कैडर को संबोधित करते हुए एमके स्टालिन ने स्वीकार किया कि डीएमके ने विपक्षी दलों के डिजिटल प्रचार की ताकत को बहुत कम आंका। उन्होंने कहा कि नए राजनीतिक दलों और अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके (TVK) ने सोशल मीडिया, रील्स और शॉर्ट वीडियो के जरिए पहली बार वोट करने वाले युवाओं को सीधे प्रभावित किया।
इसके विपरीत, डीएमके का पूरा प्रचार तंत्र पारंपरिक रैलियों, नुक्कड़ सभाओं और पुराने तौर-तरीकों पर ही टिका रहा। नतीजतन, पार्टी सरकार की प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं के फायदों को युवा मतदाताओं तक उस आधुनिक अंदाज में नहीं पहुंचा सकी, जिस तेजी से विपक्ष ने अपनी जगह बनाई।
अति-आत्मविश्वास और संवाद की कमी
स्टालिन ने जिला सचिवों और जमीनी स्तर के नेताओं की कार्यप्रणाली पर भी कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सत्ता में रहने के दौरान कई स्थानीय नेता इस मुगालते में आ गए थे कि केवल सरकारी योजनाओं के नाम पर ही जीत पक्की हो जाएगी।
इस अति-आत्मविश्वास के कारण बूथ स्तर पर आम जनता से सीधा संवाद कमजोर पड़ गया। इसके अलावा, कार्यकर्ताओं की शिकायतों और क्षेत्रीय समस्याओं को समय रहते दूर नहीं किया गया। स्टालिन ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि जो पदाधिकारी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सकते, वे खुद अपनी जिम्मेदारी छोड़कर दूसरों को मौका दे सकते हैं।
गठबंधन की स्थिति पर दी सफाई
चुनाव बाद के घटनाक्रमों पर बोलते हुए स्टालिन ने कहा कि राज्य में राष्ट्रपति शासन या केंद्र के हस्तक्षेप को रोकने के लिए उन्होंने व्यावहारिक रुख अपनाया। उन्होंने बताया कि डीएमके ने अपने पुराने गठबंधन सहयोगियों को सरकार बनाने में रुकावट नहीं बनने दी, ताकि राज्य में एक निर्वाचित सरकार काम कर सके।
हालांकि, विधानसभा में उदयनिधि स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके अब मुख्य विपक्षी दल के रूप में जनता के मुद्दों को पूरी ताकत से उठा रही है। उन्होंने कहा कि सत्ता से बाहर रहना डीएमके के लिए नया नहीं है और पार्टी पहले भी कई बार संघर्ष करके मजबूती से वापस लौटी है।
संगठन के पुनर्गठन का ऐलान
समीक्षा बैठक के अंत में स्टालिन ने कहा कि जब वे बड़ी चुनावी जीतों का श्रेय लेते हैं, तो इस पराजय की नैतिक जिम्मेदारी भी पूरी तरह उनकी ही है। उन्होंने बताया कि सभी जिलों में जमीनी हकीकत का जायजा लेने के लिए एक विशेष जांच समिति बनाई गई है।
यह समिति 20 दिनों के भीतर अपनी व्यापक रिपोर्ट सौंपेगी। इसके आधार पर डीएमके के आईटी विंग, युवा विंग और स्थानीय इकाइयों में व्यापक फेरबदल किए जाएंगे। स्टालिन ने सभी कार्यकर्ताओं से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने और जनता के बीच सक्रिय रहने का आह्वान किया।

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