केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी सोशल मीडिया पर अपने खिलाफ चलाए जा रहे कथित भ्रामक अभियानों और डीपफेक कंटेंट को लेकर बेहद सख्त रुख अपना रहे हैं। उन्होंने टेक दिग्गज मेटा, एक्स (पूर्व में ट्विटर), गूगल और कई अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में 11 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर किया है।

इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के जरिए फर्जी और छेड़छाड़ किए गए डीपफेक वीडियो तैयार किए गए हैं। इन वीडियो के जरिए केंद्रीय मंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाने की नीयत से उन्हें जबरन केंद्र सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) और ई-20 ईंधन नीति के विवादों से जोड़कर दिखाया जा रहा है।

बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस आरिफ डॉक्टर की एकल पीठ ने इस हाई-प्रोफाइल मामले पर प्रारंभिक सुनवाई की। अदालत ने नितिन गडकरी के वकील संदीप एस. लड्डा को निर्देश दिया है कि वे मुकदमे से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य अदालत को उपलब्ध कराएं। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त के लिए तय कर दी है।

24 आपत्तिजनक पोस्टों को हटाने की मांग

केंद्रीय मंत्री की ओर से अदालत में दायर याचिका में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित हो रही सामग्री न केवल भ्रामक है, बल्कि इससे उनकी वर्षों की सार्वजनिक प्रतिष्ठा को गंभीर ठेस पहुंची है।

गडकरी ने अदालत से मांग की है कि:

  • -सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ मानहानि करने वाले और ई-20 विवाद से जोड़ने वाले कम से कम 24 विशिष्ट पोस्टों, लिंक और वीडियो को तुरंत प्लेटफॉर्म्स से हटाया (Take Down) जाए।
  • -उनकी व्यक्तिगत और राजनीतिक साख को पहुंचाए गए नुकसान के मुआवजे के रूप में 11 करोड़ रुपये का हर्जाना दिया जाए।

2014 से लगातार केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय संभाल रहे गडकरी का रुख है कि ई-20 नीति का निर्धारण और क्रियान्वयन प्रशासनिक स्तर पर होता है, लेकिन कुछ असामाजिक तत्व जानबूझकर फर्जी वीडियो के माध्यम से उन्हें निशाना बना रहे हैं।

जंतर-मंतर आंदोलन से लेकर ‘गडकरी इज नेक्स्ट’ मीम्स तक

नीट (NEET) पेपर लीक और छात्र आंदोलनों के बाद जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना पड़ा, तो उसके तुरंत बाद सोशल मीडिया पर अचानक नितिन गडकरी को निशाना बनाया जाने लगा। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं के बीच और विभिन्न सोशल मीडिया पेजों पर ‘गडकरी इज नेक्स्ट’ (Gadkari Is Next) नाम से मीम्स और हैशटैग तेजी से ट्रेंड करने लगे।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने ई-20 नीति और नितिन गडकरी के खिलाफ ‘नेशनल टाउन हॉल’ आयोजित करने की घोषणा की। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि ई-20 ईंधन से वाहनों के इंजन और माइलेज पर बुरा असर पड़ रहा है। उधर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी इस नीति को तुरंत वापस लेने की मांग की है। पार्टी प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने आरोप लगाया कि पर्याप्त वैज्ञानिक जांच और वाहन चालकों के हितों को ध्यान में रखे बिना इस नीति को लागू किया गया है।

ई-20 नीति और ‘पुर्ती समूह’ से जुड़े व्यक्तिगत आरोपों पर गडकरी का जवाब

सोशल मीडिया पर कुछ पोस्टों में यह आरोप लगाया गया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति को बढ़ावा देने में नितिन गडकरी का निजी या पारिवारिक आर्थिक हित शामिल है, क्योंकि उनका परिवार गन्ना और एथेनॉल उत्पादन से जुड़े ‘पुर्ती समूह’ (Purti Group) से संबंध रखता है।

इन आरोपों पर नितिन गडकरी ने कई मौकों पर खुलकर अपनी बात रखी है और इन्हें पूरी तरह से निराधार और प्रायोजित राजनीतिक साजिश करार दिया है। गडकरी ने याद दिलाया कि भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की शुरुआत साल 2001 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में हुई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अटल जी ने यह फैसला उनके कहने पर लिया था?

उन्होंने खुलासा किया कि उनके परिवार से जुड़ी एथेनॉल निर्माण इकाइयां बहुत सीमित मात्रा (लगभग 1.3 लाख लीटर) में उत्पादन करती हैं और वे हर साल घाटे में रहती हैं। कई लोगों ने उन्हें इन इकाइयों को बंद करने की सलाह दी, लेकिन रोजगार और किसानों के प्रति लगाव के कारण वे इन्हें चला रहे हैं।

गडकरी ने कहा, “अगर मैं इलेक्ट्रिक वाहनों, ग्रीन हाइड्रोजन या फ्लैक्स इंजनों की वकालत करता हूं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि मैं गाड़ियां बनाने लगा हूं। एथेनॉल और बायो-फ्यूल को बढ़ावा देने का मकसद कच्चे तेल के भारी-भरकम आयात बिल को कम करना, प्रदूषण रोकना और भारत के किसानों की आय बढ़ाना है।”

क्या है ई-20 नीति?

सरकार ने अप्रैल 2023 में देश के चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल के मिश्रण वाला ‘ई-20’ ईंधन देना शुरू किया था, जिसे अप्रैल 2025 तक पूरे देश में अनिवार्य रूप से लागू कर दिया गया। इसने पुराने ई-10 ईंधन की जगह ली है। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने के रस, मक्के और बचे हुए अनाज से तैयार किया जाने वाला एक पर्यावरण-अनुकूल अल्कोहल है।

फिलहाल, बॉम्बे हाईकोर्ट 5 अगस्त को इस मामले में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और संबंधित पक्षों की दलीलें सुनेगा।