कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने एक बार फिर सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी का आरोप है कि उसके आंदोलन में शामिल विद्यार्थियों को परेशान किया जा रहा है। इसके अलावा, उन्हें गिरफ्तार करने की धमकी दी जा रही है।
सीजेपी ने साफ चेतावनी दी है कि अगर यह सिलसिला नहीं रुका, तो वह मोदी सरकार के खिलाफ दोबारा बड़ा आंदोलन शुरू करेगी। पार्टी ने यह भी कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बहाना बनाकर स्टूडेंट्स के खिलाफ दर्ज एफआईआर को जारी न रखे।
सौरव दास ने क्या कहा
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जंतर-मंतर और देश के कई राज्यों में सीजेपी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों से जुड़े लोगों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। हालांकि अदालत ने साफ किया था कि यह राहत उन लोगों को नहीं मिलेगी जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है।
इसी का जिक्र करते हुए सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने एक्स पर लिखा, “सुप्रीम कोर्ट का राजनीतिक इस्तेमाल सरकार के फायदे के लिए नहीं किया जा सकता। उसके आदेशों को सरकार के हित साधने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। पूरे देश के सामने एक गंभीर आश्वासन दिया गया था। उसका सम्मान किया जाना चाहिए। सभी एफआईआर वापस ली जानी चाहिए।”
उन्होंने आगे लिखा, “अगर अपराधी खुले घूम रहे थे, तो पुलिस को उनके पुराने मामलों में जमानत रद्द कराने के लिए अदालत का रुख करना चाहिए। साथ ही यह भी जवाब देना चाहिए कि वे समाज में इतनी आजादी से कैसे घूम रहे थे। लेकिन सरकार इस बहाने का इस्तेमाल एफआईआर को जारी रखने के लिए नहीं कर सकती, ताकि बाद में वास्तविक प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया जा सके।”
दास ने कहा, “अगर सरकार को इसकी छूट दी गई, तो वह निश्चित रूप से इसका इस्तेमाल करेगी। युवा इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे! हम हर उस प्रदर्शनकारी के साथ खड़े रहेंगे जिसने एक-दूसरे के भविष्य के लिए आवाज उठाई।”
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
लाइव लॉ के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने विभिन्न राज्यों में हिरासत में लिए गए नाबालिगों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने साफ किया था कि यह राहत आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारियों पर लागू नहीं होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि पुलिस की कथित ज्यादतियों के आरोप निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करते हैं। इसके साथ ही, अदालत ने संकेत दिया था कि वह इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने पर विचार कर रही है। हालांकि, इससे पहले केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया।
इसी सिलसिले में कोर्ट ने दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया। साथ ही निर्देश दिया कि प्रदर्शनों से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं।
दीपके और रांका की चेतावनी
सीजेपी का दावा है कि सरकार ने बातचीत में यह वादा किया था कि प्रदर्शन में शामिल किसी भी विद्यार्थी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। इसके अलावा, सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी। पश्चिम बंगाल, असम और बिहार जैसी राज्य सरकारें भी यह भरोसा दे चुकी हैं।
लेकिन सोशल मीडिया पर ऐसे कई पोस्ट और वीडियो सामने आ रहे हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि पुलिस उन विद्यार्थियों को डिटेन कर रही है या पूछताछ के लिए जबरन उठाकर ले जा रही है, जो प्रदर्शन में शामिल हुए थे।
इन्हीं वीडियो और पोस्ट का हवाला देते हुए सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके ने एक वीडियो संदेश में कहा, “कई राज्यों में पुलिस छात्रों को परेशान कर रही है। सरकार छात्रों को डराना-धमकाना बंद करे। अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो कॉकरोच जनता पार्टी फिर से बहुत बड़ा आंदोलन करेगी। हम फिर से प्रदर्शन करेंगे।”
वहीं सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने पीटीआई से कहा कि 25 जुलाई को केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ हुई बातचीत में साफ वादा किया गया था कि विद्यार्थियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। उन्होंने कहा, “अगर केंद्रीय मंत्रियों की बात की कोई वैल्यू नहीं है, तो मुझे नहीं पता कि सरकार में किसकी वैल्यू है।”
दिल्ली पुलिस की मंशा पर सवाल
सीजेपी ने मंगलवार को एक और दावा किया। पार्टी के मुताबिक, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल के पास मिले पत्थरों से भरे ट्रक को दिल्ली पुलिस ने चार दिनों तक अपनी कस्टडी में रखा था। यह दावा न्यूजलॉन्ड्री की एक रिपोर्ट के हवाले से किया गया है।
सीजेपी ने एक्स पर लिखा, “हमारे जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल के पास पत्थरों से भरा जो ‘रहस्यमयी’ ट्रक मिला था, वह 20 जुलाई से पहले चार दिनों तक दिल्ली पुलिस द्वारा जब्त किए गए वाहनों में शामिल था।”
पार्टी ने आगे लिखा, “इस चौंकाने वाली जांच ने हमारे सबसे बड़े डर को सही साबित किया है। ऐसा लगता है कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शन को बिगाड़ने, हिंसा भड़काने और बेगुनाह लोगों को फंसाने की सोची-समझी कोशिश की गई।”
सीजेपी ने सवाल उठाया कि जब्त किए गए पत्थरों से भरे वाहन को शांतिपूर्ण प्रदर्शन स्थल के पास लाने का आदेश किसने दिया। पार्टी ने लिखा, “दिल्ली पुलिस को इसका जवाब तुरंत देना चाहिए और उन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए जिन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की बड़ी भीड़ के बीच पत्थरों से भरे इस वाहन को रखने का फैसला किया।”
गौरतलब है कि सीजेपी के ‘संसद मार्च’ वाले दिन, 20 जुलाई को भी अभिजीत दीपके ने दावा किया था कि पुलिस ने जान-बूझकर इस ट्रक को प्रदर्शन स्थल के पास पार्क कराया था।
अब सबकी नजर इस पर है कि सरकार सीजेपी के आरोपों पर क्या जवाब देती है। इसके अलावा, दिल्ली पुलिस पत्थरों से भरे ट्रक को लेकर उठे सवालों पर सफाई पेश करती है या नहीं। अगर एफआईआर वापसी में देरी जारी रही, तो सीजेपी की दोबारा आंदोलन की चेतावनी हकीकत में बदल सकती है।

Curated news reports, in-depth analysis, and special features by India’s Opinion editorial team.




