भारत और चीन के बीच ऐतिहासिक ‘नाथू ला दर्रे’ के रास्ते सीमा व्यापार एक बार फिर बहाल होने जा रहा है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है। जानकारी के अनुसार 1 अगस्त से इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग के जरिए दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां दोबारा शुरू कर दी जाएंगी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस वार्ता के दौरान इस फैसले की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि यह निर्णय दोनों देशों के बीच पहले हुए रणनीतिक समझौतों और सहमति के तहत लागू किया जा रहा है।

19 अगस्त 2025 के समझौते का हिस्सा

प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक मार्गों को खोलने पर पहले ही सहमति बन चुकी थी। 19 अगस्त 2025 को जारी संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में भारत और चीन ने तीन पारंपरिक व्यापारिक मार्गों—लिपुलेख, शिपकी ला और नाथू ला पास के जरिए सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने पर सहमति जताई थी।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, उस समय तय किए गए फैसलों को अब धरातल पर लागू किया जा रहा है। इसके तहत पहले चरण में 1 अगस्त से नाथू ला दर्रे के रास्ते व्यापारिक आवाजाही और वस्तुओं का आदान-प्रदान शुरू हो जाएगा।

नाथू ला दर्रे का ऐतिहासिक और आर्थिक महत्व

सिक्किम राज्य में स्थित नाथू ला दर्रा भारत और चीन के बीच व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह प्राचीन ‘सिल्क रूट’ (Resham Marg) का एक प्रमुख हिस्सा रहा है। समुद्री मार्गों की तुलना में यह जमीनी मार्ग दोनों देशों के स्थानीय सीमावर्ती व्यापारियों के लिए अधिक किफायती और सुलभ माना जाता है।

साल 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद इस मार्ग को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत 44 वर्षों बाद, यानी वर्ष 2006 में इसे सीमा व्यापार के लिए दोबारा खोला गया था।

हालांकि, हाल के वर्षों में सीमा पर उपजे तनाव और अन्य रणनीतिक कारणों से यह व्यापार प्रभावित रहा था। अब इसे पुनः बहाल किया जा रहा है। इस कदम से सिक्किम और आसपास के क्षेत्रों में स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।