दिल्ली पुलिस ने उन खबरों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि पुलिस कमिश्नर को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत खास अधिकार दिए गए हैं। पुलिस ने इसे भ्रामक दावा बताया है।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया पर यह गलत सूचना फैलाई जा रही है कि पुलिस आयुक्त को एनएसए के तहत हिरासत में लेने की शक्तियां खासतौर पर सीजेपी आंदोलन को दबाने के लिए दी गई हैं।

पुलिस ने अपने बयान में साफ किया कि इसमें कुछ भी नया नहीं है। ऐसे अधिकार हर तीन महीने में नियमित रूप से दिए जाते हैं।

उपराज्यपाल द्वारा विशेष अधिकार की बात

इससे पहले खबर आई थी कि दिल्ली के उपराज्यपाल ने एनएसए, 1980 के तहत पुलिस आयुक्त को प्रिवेंटिव डिटेंशन के आदेश जारी करने का अधिकार दिया है। यह अधिकार 19 जुलाई 2026 से 18 अक्टूबर 2026 तक, यानी तीन महीने की अवधि के लिए है। हालांकि यह बात अब सार्वजनिक रूप से सामने आई है।

जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बीच इसे खासा अहम माना जा रहा है। सीजेपी ने 20 जुलाई को संसद तक मार्च का आह्वान किया था, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प में कई लोग घायल हुए थे। जंतर-मंतर पर सीजेपी और उसके कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन अब भी जारी है।

गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर में लेह के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद सोनम वांगचुक को भी एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था। उस समय उन्हें 170 दिन तक हिरासत में रखा गया था।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में घायल महिला के स्वास्थ्य पर बयान

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर घायल हुई एक महिला प्रदर्शनकारी को लेकर भी सफाई दी है। सोशल मीडिया पर यह खबर फैल रही थी कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक महिला की मौत हो गई।

पुलिस ने एक्स पर लिखा, “सोशल मीडिया पर ऐसी रिपोर्ट्स सर्कुलेट हो रही हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही एक महिला की मौत हो गई है। यह खबर झूठी और गुमराह करने वाली है।”

पुलिस ने आगे बताया कि वह महिला जीवित है और फिलहाल दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती है। इलाज कर रहे डॉक्टरों के मुताबिक उनकी हालत स्थिर है और वे अब खतरे से बाहर हैं।

दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अनवेरिफाइड कंटेंट शेयर न करने और अफवाहें न फैलाने की अपील की है। पुलिस ने लिखा कि रीपोस्ट या ऑनलाइन जानकारी शेयर करने से पहले उसे आधिकारिक चैनलों पर वेरिफाई किया जाए।

जंतर-मंतर पर तनाव अभी बरकरार है, और एनएसए अधिकार को लेकर उठे सवाल आने वाले दिनों में प्रदर्शन की दिशा तय कर सकते हैं। ऐसे में पुलिस और प्रशासन का हर बयान करीबी नजर में रहेगा, खासकर जब सोशल मीडिया पर अफवाहों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा।