उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। प्रदेश के सभी निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों को अब प्रशासक नियुक्त किया जाएगा। सामान्य पंचायत निर्वाचन-2021 के बाद बनी जिला पंचायतों का कार्यकाल 11 जुलाई 2026 को समाप्त हो रहा है।

इसी वजह से 12 जुलाई से नई जिला पंचायतों के गठन तक, या अधिकतम छह महीने तक, मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष प्रशासक के तौर पर काम संभालेंगे।

प्रमुख सचिव अनिल कुमार के स्तर से जारी शासनादेश के मुताबिक, संबंधित जिलाधिकारी अपने-अपने जिले में निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक के रूप में नामित करेंगे।

इस दौरान प्रशासक केवल सामान्य और रूटीन प्रशासनिक कामकाज ही देखेंगे। उन्हें कोई नीतिगत फैसला लेने की अनुमति नहीं होगी।

अगर किसी विशेष या आपातकालीन स्थिति में नीतिगत निर्णय की जरूरत पड़ती है, तो उसका प्रस्ताव जिलाधिकारी के जरिए राज्य सरकार को भेजा जाएगा। शासन की मंजूरी मिलने के बाद ही उस पर फैसला लिया जाएगा।

सरकार ने यह कदम उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत उठाया है, ताकि नई जिला पंचायतों के गठन तक स्थानीय प्रशासनिक कामकाज बिना रुकावट चलता रहे और विकास कार्य प्रभावित न हों।

गौरतलब है कि इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक मानने से इनकार कर दिया था। कार्यकाल खत्म होने के बाद भी प्रधानों को प्रशासक बनाने के यूपी सरकार के फैसले पर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की थी।

इस पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने एक्स पर लिखा था कि एक तरफ यूपी की भाजपा सरकार खुद की तारीफ में प्रायोजित कार्यक्रम करवा रही है।

दूसरी तरफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह कहकर सरकार को झटका दिया कि कार्यकाल खत्म होने के बावजूद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने का फैसला असंवैधानिक है।