राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक और अहम निर्देश दिया। कोर्ट ने जांच कर रही एसआईटी को अगली सुनवाई तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहन की पीठ ने उन याचिकाओं पर सुनवाई की। इन याचिकाओं में मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार एसआईटी का पुनर्गठन कर चुकी है। अब नई एसआईटी की कमान आईजी किरण एस के हाथ में है। इसके अलावा टीम में एक डीआईजी, एक आईजी और एक एसपी समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हैं।

मेहता ने यह भी बताया कि जांच में एक फॉरेंसिक ऑडिटर को भी जोड़ा जाएगा। कोर्ट ने साफ कहा कि यह ऑडिटर पांचवें सदस्य के तौर पर शामिल होगा। साथ ही, दो हफ्ते के भीतर पहली स्टेटस रिपोर्ट सौंपनी होगी।

याचिकाकर्ताओं की मांग क्या है

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील देवदत्त कामत ने अदालत के सामने एक अहम बात रखी। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि देशभर के श्रद्धालुओं ने 100 से 500 रुपये तक का योगदान दिया था। लेकिन आरोप है कि यह पूरी राशि मंदिर के निर्माण और प्रबंधन से जुड़े ट्रस्ट तक नहीं पहुंची।

कामत ने पारदर्शिता का हवाला देते हुए एक मांग रखी। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की ओर से जारी सभी रसीदों को ऑनलाइन अपलोड करने का निर्देश दिया जाए।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सीजेआई ने इस मांग पर तुरंत कोई फैसला नहीं दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल अदालत का पूरा ध्यान निष्पक्ष और तेज जांच सुनिश्चित करने पर है। इसके अलावा, एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद ही पारदर्शिता से जुड़े बाकी उपायों पर विचार किया जाएगा।

कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जांच के दौरान एसआईटी को किसी तरह की दिक्कत आती है, तो अदालत जरूरी निर्देश जारी करेगी।

अब तक क्या-क्या हुआ

पिछले कुछ हफ्तों से लगातार सुप्रीम कोर्ट में इसकी सुनवाई चल रही है। 13 जुलाई को कोर्ट ने केंद्र, यूपी सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी करते हुए किसी सीनियर आईपीएस अधिकारी की अगुवाई में नई एसआईटी बनाने का आदेश दिया था। इससे पहले जांच लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अगुवाई में हो रही थी।

अब सबकी नजर इस पर है कि नई एसआईटी दो हफ्ते के भीतर सौंपी जाने वाली पहली रिपोर्ट में क्या खुलासा करती है। वहीं फॉरेंसिक ऑडिटर के जुड़ने से जांच की दिशा और बारीक हो सकती है। अगली सुनवाई में कोर्ट का अगला कदम इसी रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।