नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को सत्ता में आए चार महीने भी नहीं हुए कि उनकी अपनी पार्टी आरएसपी के भीतर से ही असंतोष के स्वर उठने लगे हैं। छह सांसदों ने खुलकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, और पार्टी अध्यक्ष रबि लामिछाने भी नाराज़ बताए जा रहे हैं। इस बीच आत्मदाह के बाद गणेश नेपाली की मौत ने विरोधियों को एकजुट कर सरकार को बचाव की मुद्रा में ला दिया है।
सत्ता में चार महीने, सवाल शुरू
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को सत्ता में आए अभी चार महीने भी पूरे नहीं हुए हैं। लेकिन उनकी कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। ये सवाल सिर्फ विपक्ष नहीं, बल्कि उनकी अपनी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के भीतर से भी उठ रहे हैं।
हाल ही में प्रतिनिधि सभा की एक बैठक में आरएसपी सांसद जगदीश खरेल ने चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ प्रधानमंत्री की लोकप्रियता के भरोसे नहीं चल सकती।
उन्होंने सांसदों की गरिमा और उनकी भूमिका का सम्मान करने की मांग की। खरेल ने संसद में पूछा कि क्या सांसदों की भूमिका सिर्फ बैठकर मेज़ थपथपाने तक सीमित है।
आरएसपी के सांसद लगातार सरकारी फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं। यह सिलसिला संसदीय बहसों, सोशल मीडिया पोस्ट और समिति बैठकों में चल रहा है। कई मंत्रियों पर जवाबदेही और सुशासन के मानकों पर खरा न उतरने का आरोप लगाया गया है।
सांसदों के सवाल क्या हैं
आरएसपी सांसद करिश्मा कथारिया ने किसानों को समय पर खाद न मिलने पर सरकार से सार्वजनिक माफी मांगने को कहा। उन्होंने संसद में कहा कि तेज बुखार में किसानों को पैरासिटामोल से पहले खाद चाहिए, फिर भी सरकार का दिल नहीं पसीजता।
कथारिया ने आरोप लगाया कि सरकार पर्याप्त खाद होने का दावा कर जनता को गुमराह कर रही है। सांसदों ने कृषि मंत्री गीता चौधरी की सीधी आलोचना की और उनके मंत्रालय पर किसानों की समस्याएं हल न करने का आरोप लगाया।
राज्य संस्थाओं के संरक्षण में हो रही कथित गैरकानूनी गतिविधियों पर भी सांसदों ने चिंता जताई।
सरलाही से आरएसपी सांसद अमरेश कुमार सिंह ने बीबीसी हिंदी से कहा कि पार्टी के सांसद सरकार और प्रधानमंत्री से सवाल पूछ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी सवालों से परे नहीं है।
उन्होंने खुद भी प्रधानमंत्री से कहा था कि देश को किसी महानगर की तरह नहीं चलाया जा सकता। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल सरकार को कोई खतरा नहीं है, लेकिन कार्यशैली में सुधार जरूरी है।
बालेन शाह की कार्यशैली पर सवाल
नेपाली अखबार कांतिपुर ने ऐसे छह आरएसपी सांसदों के बयान छापे हैं, जिन्होंने सरकार से खुलकर असंतोष जताया है। प्रधानमंत्री बनने से पहले भी बालेन शाह के भाषण पर सवाल उठे थे।
मार्च में चुनाव प्रचार के दौरान धनगढ़ी की एक रैली में उन्होंने कहा था कि जो सड़कें दो साल में बननी चाहिए, वे 20 साल तक अधूरी रहती हैं, और अब ठेकेदारों को समय पर काम पूरा करना होगा।
पारंपरिक पार्टियों से निराश मतदाताओं ने तब शाह की बातों को खूब सराहा था। पांच मार्च के चुनाव में आरएसपी को भारी जनादेश मिला। पार्टी बनने के महज चार साल के भीतर उसने करीब दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया।
27 मार्च को बालेन शाह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। जनता का भरोसा जितना बड़ा था, सरकार से उम्मीदें भी उतनी ही ऊंची थीं।
पार्टी और सरकार में मतभेद
नेपाली अखबार माय रिपब्लिका ने 13 जुलाई को खबर दी थी कि आरएसपी अध्यक्ष रबि लामिछाने भी बालेन शाह की कार्यशैली से खुश नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार पार्टी के पहले महाधिवेशन के बाद आंतरिक मतभेद खुलकर सामने आने लगे।
रविवार को दोनों नेताओं के बीच बैठक हुई, जिसमें लामिछाने ने प्रधानमंत्री को सरकार की कार्यशैली बदलने की सलाह दी।
रिपोर्ट के मुताबिक बैठक में पार्टी पदाधिकारियों की नियुक्ति और मंत्रियों में संभावित फेरबदल पर चर्चा हुई। इस दौरान लामिछाने ने काठमांडू में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी और गणेश नेपाली की मौत को लेकर भी चिंता जताई।
सांसद अमरेश सिंह कहते हैं कि पार्टी और सरकार को एक पेज पर आना चाहिए, लेकिन अभी ऐसा नहीं हो पाया है।
नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार युग पाठक बालेन शाह की कार्यशैली पर सवाल उठाते हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री संसद में बहुत कम समय देते हैं और सवालों के जवाब नहीं देते।
वह राष्ट्रपति से भी नहीं मिलते और अभिभाषण के बीच से उठकर चले जाते हैं। पाठक का मानना है कि आने वाले समय में और सांसद भी खुलकर सामने आ सकते हैं। उनके मुताबिक बालेन के समर्थक बुद्धिजीवी भी अब अपनी राय बदल रहे हैं।
गणेश नेपाली की मौत ने बदला माहौल
गणेश नेपाली का अंतिम संस्कार सोमवार को आर्यघाट में हुआ। आत्मदाह की कोशिश में गंभीर रूप से झुलसने के दो दिन बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। इस घटना ने सरकार विरोधियों को एक मंच पर ला दिया है और सरकार को बचाव की मुद्रा में डाल दिया है।
गणेश नेपाली रोजी-रोटी के लिए राइड-शेयरिंग बाइक चलाते थे। गुरुवार को काठमांडू पुलिस ने पासपोर्ट कार्यालय के बाहर बाइक खड़ी करने पर उनकी बाइक लॉक कर दी और 1,000 नेपाली रुपये जुर्माना लगाया।
चश्मदीदों के अनुसार पुलिसकर्मियों से बहस के बाद उन्होंने आत्मदाह कर लिया। उन्हें बीर अस्पताल ले जाया गया, जहां शुक्रवार तड़के उनकी मौत हो गई।
जेन-जी आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल कानून के छात्र मज्जिद अंसारी भी हाल में गिरफ्तार हुए और कथित तौर पर पिटाई का शिकार हुए। 26 वर्षीय अंसारी फिलहाल अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।
उनका कहना है कि उन्हें किस वजह से हिरासत में लिया गया, यह अब तक साफ नहीं हुआ। अंसारी के मुताबिक वह कीर्तिपुर के एक अस्थायी आश्रय केंद्र गए थे, जहां 26 अप्रैल की कार्रवाई में विस्थापित हुए लोग रह रहे थे।
वहां रहने वालों को बिना किसी वैकल्पिक इंतजाम के केंद्र खाली करने को कहा जा रहा था। जेन-जी कार्यकर्ता तनुजा पांडे के मुताबिक झड़प के दौरान पुलिसकर्मियों ने अंसारी के सिर और चेहरे पर जूतों से वार किए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं

Jitendra Kumar is a graduate of the acclaimed IIMC with extensive experience across leading newspapers and media organisations.




