राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर बुधवार को एक बार फिर छात्र राजनीति और विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बन गया। वामपंथी विचारधारा से जुड़े प्रमुख छात्र संगठनों स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और ‘दिशा’ के कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर केंद्र और राज्य सरकारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारी छात्रों का सीधा आरोप है कि हालिया छात्र आंदोलनों के बाद विभिन्न राज्यों में पुलिस प्रशासन आंदोलनकारियों के खिलाफ दमनकारी नीतियां अपना रहा है।

प्रदर्शन में शामिल छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में हुए बड़े जनआंदोलनों के बाद विशेष रूप से बिहार, असम और पश्चिम बंगाल के छात्रों को पुलिस प्रशासन द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। साथ ही, छात्रों का कहना है कि आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले युवाओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।

बिहार का उदाहरण देते हुए प्रदर्शनकारियों ने अपनी आशंका जाहिर की।

छात्रों का कहना है कि हालांकि बिहार पुलिस ने 26 जुलाई की शाम तक किसी भी कठोर कार्रवाई न करने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद उन्हें अंदेशा है कि पुलिस बैकडेट में एफआईआर दर्ज करके छात्रों को गिरफ्तार कर सकती है।

इस प्रदर्शन के दौरान छात्र संगठनों ने केवल सरकार पर ही नहीं, बल्कि विपक्षी राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधा।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का जिक्र करते हुए वामपंथी छात्र नेताओं ने कहा कि केवल बयानों और चेतावनियों से काम नहीं चलने वाला। छात्र नेताओं ने सीजेपी को चेतावनी जारी करने के बजाय खुद सड़क पर उतरकर छात्रों के हक में संघर्ष करना चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने कड़े तेवर दिखाते हुए बिहार प्रशासन को अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि अगर बिहार पुलिस जेलों में बंद सभी बेकसूर प्रदर्शनकारियों और छात्रों को जल्द से जल्द रिहा नहीं करती है, तो 30 जुलाई को बिहार में एक विशाल राज्यस्तरीय मार्च निकाला जाएगा।