शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स के पैरा एथलेटिक्स में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है.
वहीं लॉन्ग जंप में खिलाड़ी सर्वेश कुशारे, वल्लुरी अजय बाबू और ज्ञानेश्वरी यादव ने एक-एक सिल्वर मेडल जीतकर भारत के पदकों की संख्या में बढ़ा दी है.
शर्मिला ने महिलाओं की एफ 57 वर्ग के गोला फेंक कॉम्पीटिशन में 9.81 मीटर के सेशन में अपना मेडल जीता.
सोमवार देर रात मिली इस जीत के साथ वह कॉमनवेल्थ खेलों में पैरा एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई है.
इसके साथ ही पैरा एथलेटिक्स में मेडल के लिए भारत का 20 साल का इंतजार भी ख़त्म हो गया. गौरतलब है कि इससे पहले इस स्पर्द्धा में भारत को आख़िरी पदक 2006 के कॉमनवेल्थ गेम्स में मिला था.
महेंद्रगढ़ जिले के छितरौली गांव की रहने वाली शर्मिला ने महिलाओं की शॉट पुट एफ-57 स्पर्धा में 9.81 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया है।
इसके साथ ही वह कॉमनवेल्थ गेम्स की पैरा एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली खिलाड़ी बन गईं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शर्मिला को बधाई दी। सीएम ने कहा कि शर्मिला के प्रदर्शन ने देश और हरियाणा का नाम रोशन किया है।
शर्मिला की यह जीत सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास की सबसे बड़ी मिसाल है। दो साल की उम्र में पोलियो ने उनका एक पैर कमजोर कर दिया।
आर्थिक तंगी में बचपन बीता और पहली शादी में दहेज के लिए प्रताड़ना व घरेलू हिंसा का दर्द सहना पड़ा। 26 वर्ष की उम्र में दो बेटियों के साथ उन्हें घर से निकाल दिया गया। हार मानने के बजाय उन्होंने जिंदगी से लड़ने का फैसला किया। इसका परिणाम आज पूरी दुनिया के सामने है।

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