संसद के मॉनसून सत्र से एक दिन पहले सरकार ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई। लेकिन बैठक शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट कर दिया।

यह बैठक संसद भवन एनेक्सी के मुख्य समिति कक्ष में सुबह 11 बजे शुरू हुई। इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और डीएमके सहित कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। कुछ ही देर बाद इन नेताओं ने बैठक छोड़ दी।

विवाद की जड़ क्या है

विपक्षी सांसदों का आरोप है कि सरकार ने टीएमसी के बागी सांसदों के गुट को बैठक में बुलाया। इस गुट में करीब 20 सांसद शामिल हैं। इसके अलावा, इन सांसदों ने खुद को नई पार्टी ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) में विलय का दावा किया है।

विपक्ष का कहना है कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अभी तक इस गुट को मान्यता नहीं दी है। ऐसे में इन्हें सर्वदलीय बैठक में बुलाना नियमों के खिलाफ है।

महुआ मोइत्रा ने उठाए सवाल

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, “आज पूरे विपक्ष ने ऑल पार्टी मीटिंग से वॉकआउट किया है।” उन्होंने कहा कि तथाकथित एनसीपीआई एक मान्यता प्राप्त पार्टी नहीं है। उनके मुताबिक, टेबल ऑफिस की सूची में टीएमसी की सांसद संख्या 28 दिखाई गई है।

मोइत्रा ने बताया कि 20 बागी सांसदों के विलय को स्पीकर ने अभी मंजूरी नहीं दी है। इन सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की याचिकाएं भी लंबित हैं।

उन्होंने संविधान के 91वें संशोधन का हवाला दिया। उनके मुताबिक, इस संशोधन के बाद अलग समूह बनाने की कोई गुंजाइश नहीं बचती। इसके साथ ही, मोइत्रा ने सवाल उठाया कि संसदीय कार्य मंत्री ने किस आधार पर इन बागी सांसदों को बैठक में बुलाया।

मोइत्रा ने कहा कि विपक्ष ने इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। इसके बाद सभी दल बैठक से बाहर निकल गए। इसके साथ ही, उन्होंने साथ खड़े होने के लिए सभी विपक्षी दलों का धन्यवाद भी किया।

कांग्रेस ने भी जताई नाराज़गी

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि पार्टी ने विपक्षी दलों के समर्थन में बैठक से वॉकआउट किया। उन्होंने कहा, “संविधान की अवहेलना करके टीएमसी, आम आदमी पार्टी और शिवसेना के साथ जो हुआ है… उनके समर्थन में संविधान की रक्षा के लिए कांग्रेस ने बैठक से वॉकआउट किया है।”

यह पूरा विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद शुरू हुआ। इसके बाद टीएमसी के करीब 20 लोकसभा सांसदों ने बगावत का रास्ता अपनाया। बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार इस गुट की प्रमुख नेता मानी जाती हैं।

साथ ही, सुदीप बंद्योपाध्याय को गुट का लोकसभा नेता और शताब्दी रॉय को उप नेता बनाए जाने की चर्चा है।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इन बागी सांसदों को औपचारिक रूप से सर्वदलीय बैठक का न्योता भेजा था। यही कदम विपक्ष के विरोध की वजह बना।

मॉनसून सत्र यानी 18वीं लोकसभा का 9वां सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा। अब सबकी नजर इस पर है कि स्पीकर ओम बिरला बागी सांसदों के गुट को औपचारिक मान्यता देते हैं या नहीं। साथ ही, सत्र के पहले ही दिन इस मुद्दे पर सदन में कैसा हंगामा देखने को मिलता है।