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Mamta Dubey

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MA (Hindi, Sociology) | B.Ed.

A dedicated educator and writer with 37+ years of teaching experience, including roles as College Principal, Head of the Hindi Department, and CBSE Head Examiner. Passionate about literature, culture, and social values, she firmly believes that words are a powerful tool for positive change.

भारत छोड़ो आंदोलन: तब अंग्रेजों के विरुद्ध, आज बुराइयों के विरुद्ध

यह लेख 8 अगस्त 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन को याद करते हुए उसकी आज की प्रासंगिकता पर विचार करता है। लेखिका ममता दुबे...

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस: आंदोलन नहीं, सकारात्मक परिवर्तन का संकल्प

इस लेख में अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर युवा शक्ति को सकारात्मक और रचनात्मक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ाने का आह्वान किया...

करघे की खट-खट में बसती है भारत की आत्मा

लेखिका ममता दुबे का यह लेख राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस (7 अगस्त) के अवसर पर हस्तकरघा कला, बुनकरों के परिश्रम और भारतीय सांस्कृतिक पहचान के...

भारत की शिक्षा व्यवस्था: डिग्री से दक्षता, रोजगार से राष्ट्रनिर्माण तक

भारत आज उस ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है जहाँ उसकी सबसे बड़ी पूँजी न प्राकृतिक संसाधन हैं और न ही विशाल भूभाग, बल्कि उसकी...

आज की सबसे बड़ी हार रणभूमि में नहीं, मनभूमि में हो रही है।

यह वाक्य केवल एक सूक्ति नहीं, बल्कि आज के समाज का यथार्थ है। पहले मनुष्य का संघर्ष मुख्यतः बाहरी परिस्थितियों से होता था—युद्ध, अकाल,...

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