अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने सिंधु जल संधि लेकर पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह संधि ‘भारत और पाकिस्तान के बीच सद्भावना और दोस्ती की भावना’ से हुई थी। इसके अलावा, उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान ने पांच दशकों में इस भावना को खत्म करने का काम किया है।’

क्वात्रा ने यह बात न्यूज़वीक मैगज़ीन में प्रकाशित अपने लेख में कही है। उन्होंने कहा, “भारत का सिंधु जल संधि को संधि को स्थगित करना केवल उस वास्तविकता को स्वीकार करना है। इसके अलावा, उस वास्तविकता को पाकिस्तान की नीतियों ने जन्म दिया। “

खबरों के मुताबिक क्वात्रा का यह बयान पाकिस्तान की ओर से हाल ही में आयोजित उस सम्मेलन के बाद आया है। उस सम्मेलन में भारत के सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के फ़ैसले का विरोध किया गया था।

गौरतलब है कि भारत ने यह फ़ैसला पहलगाम हमले के एक दिन बाद लिया था। उस हमले में चरमपंथियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी थी। क्वात्रा ने कहा कि संधि की प्रस्तावना में इसे ‘सद्भावना और मित्रता की भावना’ से किया गया समझौता बताया गया था। इसके अलावा, पाकिस्तान ने वर्षों तक अपने क़दमों से इस भावना को कमज़ोर किया है।

क्वात्रा ने पाकिस्तान को घेरते हुए कहा, “पाकिस्तान ने 1965, 1971 और 1999 में भारत के ख़िलाफ़ युद्ध किए। इसके अलावा लंबे समय तक सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा दिया।”

इस दौरान उन्होंने संसद हमले (2001), मुंबई हमला (2008), पठानकोट और उरी हमले (2016), पुलवामा हमला (2019) और पहलगाम हमले (2025) का भी उल्लेख किया।

विनय मोहन क्वात्रा ने कहा, “अगर पाकिस्तान वास्तव में द्विपक्षीय मुद्दों पर भारत का सहयोग चाहता है तो उसे सबसे पहले वर्षों से बनाए गए आतंकी ढाँचे को ख़त्म करना होगा।”

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में जल संकट के लिए भारत सरकार नहीं बल्कि वहां की सरकार की ख़राब जल प्रबंधन नीतियां ज़िम्मेदार हैं।

क्वात्रा ने कहा कि पाकिस्तान को भारत पर आरोप लगाने के बजाय अपनी जल उत्पादकता और घरेलू व्यवस्था सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।