शांति की एक उम्मीद के बाद पश्चिम एशिया का संकट एक बार फिर से गहराता नजर आ रहा है। संधि टूटने के बाद अमेरिका और ईरान फिर से युद्ध में उलझते दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को मिलकर ईरान पर हमला किया था। महीनों चले युद्ध और तमाम जान-माल के नुकसान के बाद दोनों देश युद्ध विराम समझौते को लागू करने के लिए सहमत हो गए थे।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस समझौते पर वर्साय के महल में हस्ताक्षर किए थे। यह वही जगह है, जहां प्रथम विश्व युद्ध को समाप्त करने के लिए मित्र देशों और जर्मनी के बीच संधि पर हस्ताक्षर हुए थे, और जल्द ही यह संधि टूटकर द्वितीय विश्व युद्ध का कारण बनी थी।

एक बार फिर से वर्साय शांति के बजाय युद्ध का गवाह बनने की ओर अग्रसर है। शांति के कुछ दिन बीतने के बाद फिर से तनाव बढ़ता दिख रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच कई दौर की बातचीत हुई। 17 जून को दोनों देशों के बीच समझौता हुआ था। लेकिन ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमला कर दिया। इसके बाद राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सीजफायर तोड़ दिया।

अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर टूटा

ट्रंप ने बुधवार, 8 जुलाई को युद्धविराम खत्म होने का ऐलान किया। ईरान ने होर्मुज में टैंकरों पर हमला किया था। इसके जवाब में ट्रंप ने अमेरिकी सेना को ईरानी ठिकानों पर हमले का आदेश दिया।

ईरान ने इस हफ्ते होर्मुज में तीन टैंकरों पर हमला किया। अमेरिका ने जवाब में ईरानी सैन्य ठिकानों पर करीब 90 हमले किए। तेहरान ने दावा किया कि उसने बहरीन और कुवैत पर 85 जवाबी हमले किए।

वर्साय में हुआ था समझौता

ट्रंप ने 17 जून को वर्साय के महल में ईरान के साथ 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। यहीं पर 107 साल पहले प्रथम विश्व युद्ध औपचारिक रूप से समाप्त हुआ था।

तब अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन और मित्र राष्ट्रों के नेताओं ने जर्मनी के साथ वर्साय संधि पर दस्तखत किए थे। जर्मनी पर कठोर शर्तें थोपी गई थीं। इसी वजह से स्थायी शांति की जगह दूसरे विश्व युद्ध की जमीन तैयार हो गई थी।

अमेरिका-ईरान समझौते पर भी उसी जगह हस्ताक्षर हुए। लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा अनसुलझा रह गया। दोनों देशों ने कहा था कि अंतिम समझौते तक होर्मुज और यूरेनियम का मसला सुलझा लिया जाएगा। 60 दिनों के युद्धविराम का यह समझौता एक महीने भी नहीं टिक पाया।

क्या फिर छिड़ेगा युद्ध?

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से जानकारी लेने के बाद ट्रंप ने बड़ा फैसला लिया। उन्होंने ईरान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल बेचने की अनुमति रद्द कर दी। साथ ही नए हमलों का आदेश भी दिया।

ईरान भी हर हमले का जवाब दे रहा है। उसने अमेरिका से जुड़ी सुविधाओं और अमेरिकी सेना की मेजबानी करने वाले खाड़ी देशों को निशाना बनाया।

अंकारा में NATO समिट के दौरान ट्रंप से पूछा गया कि क्या अमेरिका-ईरान समझौता खत्म हो गया है। ट्रंप ने कहा कि यह दिलचस्प सवाल है और यह समझौता खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि वह अब ईरान से कोई डील नहीं करना चाहते।

ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर तीखी टिप्पणी भी की। इसके बावजूद उन्होंने बातचीत जारी रखने की गुंजाइश छोड़ी। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि वॉशिंगटन कूटनीतिक समाधान चाहता है और तकनीकी स्तर पर बातचीत अभी भी जारी है।

क्या ईरान युद्ध को कंट्रोल कर रहा है?

ट्रंप के मुकाबले ईरान इस युद्ध पर ज्यादा नियंत्रण रखता दिख रहा है। तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य में अपना दबदबा चाहता है। वह कम लागत में ही बड़ी गड़बड़ी पैदा कर सकता है। दूसरी तरफ अमेरिका को होर्मुज की सुरक्षा की गारंटी देने में भारी खर्च उठाना पड़ रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का करीब पांचवां हिस्सा तेल और एलएनजी गुजरता है। ईरान ने इस जलमार्ग पर नियंत्रण करके युद्ध की दिशा भी अपने हाथ में ले ली है।

ईरान का मकसद जलमार्ग को हमेशा के लिए बंद करना नहीं है। उसका मकसद यह साबित करना है कि जब तक उसे इस जलमार्ग की प्रमुख सुरक्षा शक्ति नहीं माना जाता, तब तक कोई अंतिम समझौता संभव नहीं होगा।

ट्रंप को रोकना होगा युद्ध

ईरान अमेरिका के हर हमले को झेलने के लिए तैयार दिख रहा है। ईरान के नए नेतृत्व का मानना है कि ट्रंप इस युद्ध से जल्द बाहर निकलना चाहते हैं।

दुनियाभर में बढ़ती पेट्रोल कीमतें और अमेरिका में आने वाले मध्यावधि चुनाव ट्रंप पर दबाव बना रहे हैं। नवंबर में अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने हैं। इसी वजह से ट्रंप किसी भी तरह इस युद्ध को जल्द रोकना चाहेंगे।