ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल (कॉमनवेल्थ गेम्स) 2026 का रविवार को 11वां और आखिरी दिन है। इस अंतिम दिन भारत के सामने अभी तीन पदक मुकाबले बाकी हैं, जबकि जूडो स्पर्धा में भी भारतीय एथलीटों से पदक की प्रबल उम्मीदें हैं।
इस बार शूटिंग, रेसलिंग (कुश्ती) और बैडमिंटन जैसे भारत के पारंपरिक रूप से मजबूत खेल प्रतियोगिता में शामिल नहीं थे। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने चुनौतियों का डटकर सामना किया और वेटलिफ्टिंग, जूडो तथा मुक्केबाजी में बेहद शानदार प्रदर्शन किया।
भारत अब तक कुल 39 पदक जीत चुका है और पदक तालिका में चौथे स्थान पर काबिज है।
पदक तालिका में भारत और शीर्ष देश
10वें दिन भारतीय खिलाड़ियों ने एक साथ 16 पदक अपने नाम किए। इसके साथ ही भारत के पदकों की कुल संख्या 39 तक पहुंच गई। भारत के खाते में 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं।
अंतर्राष्ट्रीय पदक तालिका की मौजूदा स्थिति इस प्रकार है:
- ऑस्ट्रेलिया: 158 पदकों के साथ तालिका में शीर्ष (पहले) स्थान पर है।
- इंग्लैंड: 102 पदकों के साथ दूसरे स्थान पर बना हुआ है।
- कनाडा: 59 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर है।
- भारत: 39 पदकों के साथ चौथे स्थान पर मौजूद है।
वहीं, अगर भारत के अब तक के सबसे सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की बात करें, तो वह नई दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 में रहा था। उस समय भारत ने अपने घरेलू मैदान पर रिकॉर्ड 101 मेडल जीते थे, जिसमें 38 गोल्ड, 27 सिल्वर और 36 ब्रॉन्ज मेडल शामिल थे।
पैरा खेलों में रचा नया इतिहास
भारतीय एथलीटों ने पैरा खेलों में भी अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए नया इतिहास रच दिया है। भारत ने पैरा इवेंट्स में कुल 7 पदक हासिल किए हैं, जिनमें 3 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज शामिल हैं।
यह उपलब्धि इसलिए बेहद खास है क्योंकि यह अकेला आंकड़ा राष्ट्रमंडल खेलों के पूरे पैरा खेल इतिहास में भारत द्वारा जीते गए कुल पदकों के बराबर है।
गुलवीर सिंह का एथलेटिक्स में दोहरा धमाका और नया रिकॉर्ड

27 वर्षीय धावक गुलवीर सिंह ने शनिवार को भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख दिया। वह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में 5,000 मीटर दौड़ स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी (पुरुष या महिला) बन गए हैं।
इसके साथ ही, गुलवीर सिंह ने एक और बहुत बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। वह एक ही राष्ट्रमंडल खेलों के संस्करण में एथलेटिक्स (ट्रैक एंड फील्ड) में एक से अधिक पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं।
गुलवीर का दोहरे पदक का सफर इस प्रकार रहा:
- 10,000 मीटर दौड़ (सिल्वर मेडल): गुलवीर सिंह ने सबसे पहले पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में सिल्वर पदक जीतकर इतिहास बनाया था। राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में इस स्पर्धा में भारत का यह पहला पदक था।
- 5,000 मीटर दौड़ (ब्रॉन्ज मेडल): इसके बाद उन्होंने पुरुषों की 5,000 मीटर दौड़ में बेहद कड़े मुकाबले के बीच 13 मिनट 24.95 सेकंड का समय निकाला और ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।
- गोल्ड विजेता: इस 5,000 मीटर स्पर्धा का गोल्ड मेडल कीनिया के मैथ्यू किपचुम्बा किपसांग ने जीता, जिन्होंने 13 मिनट 23.61 सेकंड का समय निकाला।
रिंग में उतरने से पहले ही टूटा रिकॉर्ड: मुक्केबाजी में इतिहास

ग्लासगो 2026 में भारत का सबसे असरदार और दबदबे वाला प्रदर्शन मुक्केबाजी (बॉक्सिंग) में देखने को मिला। शनिवार को 10वें दिन किसी भी भारतीय मुक्केबाज़ के रिंग में उतरने से पहले ही भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों का नया रिकॉर्ड तोड़ दिया था।
मुक्केबाजी के फाइनल मुकाबले शुरू होने से पहले ही भारत के 10 पदक पक्के हो चुके थे। भारतीय मुक्केबाज़ों ने कुल 10 पदक हासिल किए, जिनमें 7 गोल्ड और 3 सिल्वर मेडल शामिल हैं। यह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में भारत का अब तक का सबसे सफल मुक्केबाजी अभियान बन गया है।
महिला मुक्केबाजों का दबदबा और मुख्य नतीजे
महिला मुक्केबाजी टीम ने इस बार भारतीय अभियान की मुख्य रीढ़ तैयार की।
- जैस्मीन लम्बोरिया: 57 किलोग्राम भार वर्ग की मौजूदा विश्व चैंपियन जैस्मीन लम्बोरिया ने आयरलैंड की अनुभवी मुक्केबाज़ मिकाएला वॉल्श के खिलाफ रिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता।
- प्रिया घनघस: प्रिया घनघस ने भी अपने वर्ग में शानदार खेल दिखाते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया और महिला टीम के सफल अभियान को मजबूती दी।
- उभरती मुक्केबाज़: 51 किलोग्राम भार वर्ग में स्टार मुक्केबाज़ निखत ज़रीन की जगह लेने वाली साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, जैस्मीन लम्बोरिया और लवलीना बोरगोहेन ने साबित कर दिया कि वे भविष्य में और भी बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखती हैं।
- लवलीना बोरगोहेन का मुकाबला: शनिवार को केवल लवलीना बोरगोहेन और जादूमणि सिंह को छोड़कर बाकी सभी भारतीय मुक्केबाज़ अपने-अपने फाइनल मुकाबले जीतने में सफल रहे। लवलीना को 75 किग्रा वर्ग के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया की मौजूदा वर्ल्ड ब्रॉन्ज मेडल विजेता एम्मा सू ग्रीनट्री से 1-4 से हार का सामना करना पड़ा और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा।
पुरुष वर्ग में भी मिली बड़ी सफलता
पुरुष मुक्केबाजी वर्ग में भी भारतीय मुक्केबाज़ों ने अपना परचम लहराया। पुरुष वर्ग के फाइनल मुकाबलों में सचिन सिवाच और अंकुश ने विरोधी मुक्केबाज़ों को मात देकर अपने-अपने भार वर्ग में शानदार जीत दर्ज की और स्वर्ण पदक अपने नाम किए।

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