ब्रिटेन के दक्षिण-पश्चिम में ग्लूस्टरशायर शहर में स्थित RAF फेयरफोर्ड एयरबेस के पास रविवार को सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी घटना सामने आई। पुलिस ने यहां विस्फोटक संबंधी अपराधों के शक में कई लोगों को गिरफ्तार किया है। साथ ही एयरबेस को हाई अलर्ट पर रखा गया है। हालांकि अधिकारियों की ओर से यह जानकारी नहीं दी गई है कि कितने लोगों को हिरासत में लिया गया है।

ब्रिटिश सेना की विशेषज्ञ बम निरोधक टीम ने RAF फेयरफोर्ड एयरबेस के आसपास सभी इलाकों को सील कर दिया है और सभी वाहनों की जांच शुरू कर दी। एहतियात के तौर पर सुरक्षा एजेंसियों ने आसपास के कई घरों को खाली करा लिया है और वहां से लोगों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया है।

पुलिस ने बताया ‘बड़ी घटना’

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूके पुलिस ने इस घटना को ‘बड़ी घटना’ घोषित किया है। ग्लूस्टरशायर पुलिस के मुताबिक, एयरबेस के आसपास के इलाकों में कई प्रॉपर्टीज को खाली कराया गया। कई लोगों की गिरफ्तारी के बाद बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाया गया। पुलिस ने बाद में कहा कि स्थिति अब नियंत्रण में है।

एयरबेस के पास इमरजेंसी तैनात

रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में एक चश्मदीद के हवाले से लिखा है कि सशस्त्र पुलिसकर्मी वायुसेना एयरबेस के मुख्य प्रवेश द्वार तक लोगों को जाने से रोक रहे हैं। एयरबेस के पासगांव में एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड सहित करीब 30 इमरजेंसी वाहनों को तैनात किया गया है। पास के एक गांव के लोगों को एहतियात के तौर पर एक लीजर सेंटर में ले जाया गया।

ईरान से हमले का है अंदेशा

बता दें कि RAF फेयरफोर्ड लंबे समय से अमेरिकी वायु सेना का एयरबेस रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका इस एयरबेस का इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए करता है। मार्च में यहां 21 बमवर्षक विमानों का जमावड़ा हुआ था जिसमें बी-1 लैंसर और बी-52 स्ट्रेटोफोर्ट्रेस शामिल थे। यह शीत युद्ध के बाद ब्रिटिश धरती पर सबसे बड़ा बमवर्षक जमावड़ा था। वर्तमान में भी बेस पर 5 बी-1 लैंसर मौजूद हैं।

ईरान की टारगेट लिस्ट में एयरबेस

इस अमेरिकी एयरबेस को हाई अलर्ट पर रखा गया है। रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि ईरान ने इस एयरबेस को अपनी टारगेट लिस्ट में रखा है। अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था। इसके बाद ब्रिटेन सरकार ने अमेरिकी सेना को ईरान के मिसाइल ठिकानों पर हमले के लिए फेयरफोर्ड एयरबेस के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। अब माना जा रहा है कि ईरान ने इस एयरबेस को अपनी टारगेट लिस्ट में रखा है।