बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के शीर्ष संगठन में सोमवार को एक बड़ा फेरबदल देखने को मिला। पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को दोबारा पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक (नेशनल कोऑर्डिनेटर) नियुक्त कर दिया है।

मायावती ने लखनऊ स्थित प्रदेश कार्यालय में आयोजित वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया। जैसा कि Amar Ujala की विशेष रिपोर्ट में बताया गया है, उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार पार्टी संगठन में किसी और बदलाव की जरूरत नहीं पड़ेगी,

लोकसभा चुनाव के समय हुई थी पद से विदाई

आकाश आनंद को 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान कड़े बयानों के बाद अचानक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था। उस समय मायावती ने उन्हें राजनीतिक रूप से ‘अपरिपक्व’ बताते हुए उत्तराधिकारी और राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटा दिया था।

हालांकि, हालिया महीनों में संगठन के भीतर युवा नेतृत्व की कमी महसूस की जा रही थी। आकाश आनंद ने भी अनुशासन में रहकर पार्टी के निर्देशों का पालन किया और लगातार संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहे।

नतीजतन, मायावती ने उनके आचरण और कार्यशैली में आए ठहराव को देखते हुए उन्हें दोबारा पार्टी की मुख्यधारा में लाने का निर्णय लिया।

2027 के विधानसभा चुनाव और युवा दलित वोट बैंक पर नजर

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर आजाद और इंडिया गठबंधन लगातार दलित बस्तियों में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

ऐसे में बसपा को युवा वर्ग से सीधे संवाद करने वाले एक ऊर्जावान चेहरे की सख्त जरूरत थी। लंदन से शिक्षित आकाश आनंद युवाओं के बीच आधुनिक प्रचार शैली और सोशल मीडिया के जरिए अच्छी पकड़ रखते हैं।

इसलिए पार्टी रणनीतिकारों का मानना है कि उनकी वापसी से कैडर में नया उत्साह पैदा होगा और युवा मतदाता दोबारा हाथी चुनाव चिह्न की ओर आकर्षित होंगे।

देश भर में पार्टी संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी

राष्ट्रीय संयोजक के रूप में आकाश आनंद को केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य चुनावी राज्यों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। वे जल्द ही विभिन्न राज्यों का दौरा शुरू करेंगे।

मायावती ने उन्हें बूथ कमेटियों को सक्रिय करने और युवाओं को पार्टी के मिशन से जोड़ने का विशेष निर्देश दिया है। इसके अलावा, वे बहुजन आंदोलन के संस्थापक कांशीराम और डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को घर-घर पहुंचाने के लिए कैडर कैंप आयोजित करेंगे।

दूसरी ओर, बैठक में मौजूद जिला प्रभारियों और जोनल संयोजकों ने इस फैसले का खुलकर स्वागत किया।

बसपा के भविष्य को लेकर साफ हुआ संदेश

इस नियुक्ति के साथ ही बसपा में नेतृत्व को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लग गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती ने साफ संदेश दे दिया है कि पार्टी का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। आकाश आनंद के सामने अब पार्टी के पारंपरिक जनाधार को एकजुट रखने और नए वोटरों को जोड़ने की कठिन चुनौती होगी।

कुल मिलाकर, लखनऊ में हुआ यह फैसला आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति को एक नया मोड़ देने जा रहा है।