भारतीय शेयर बाजार में 24 सितंबर को जोरदार बिकवाली देखने को मिली। पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बाजार में मंदी का रुख बना रहा। दोनों प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स भारी गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 1247.71 अंक यानी 1.67 प्रतिशत का गोता लगाकर 73,580.54 अंक के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 383.70 अंक यानी 1.64 प्रतिशत टूटकर 23,063.10 के स्तर पर आ गया। वैश्विक स्तर पर उपजे नकारात्मक संकेतों, बॉन्ड यील्ड में तेजी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की धारणा को बुरी तरह प्रभावित किया।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और ब्याज दरों की चिंता
वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए सबसे बड़ा झटका अमेरिकी बॉन्ड बाजार से आया है। अमेरिका में 10 साल की बेंचमार्क ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है, जो साल 2007 के बाद का उच्चतम स्तर है। बॉन्ड यील्ड में इस उछाल का स्पष्ट अर्थ है कि निवेशक अमेरिकी सरकारी प्रतिभूतियों पर अधिक रिटर्न की उम्मीद कर रहे हैं। इससे अमेरिकी डॉलर की संपत्तियां वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो गई हैं। इसके परिणामस्वरूप भारत जैसे उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी की निकासी का दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा आगामी बैठक में ब्याज दरें बढ़ाने के संकेत देने से अक्टूबर में नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की आशंका फिर से गहरा गई है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और आर्थिक चुनौतियां
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतें भी शेयर बाजार पर दबाव का एक बड़ा कारण बनी हैं। ब्रेंट क्रूड एक बार फिर 102 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गया है। भारत अपनी पेट्रोलियम आवश्यकताओं का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। कच्चे तेल के दामों में यह उछाल देश के चालू खाता घाटे, व्यापार संतुलन और महंगाई के स्तर के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है। तेल की बढ़ती लागत से कंपनियों के इनपुट खर्च में वृद्धि होने की आशंका है, जिससे आने वाली तिमाहियों में उनके परिचालन मार्जिन और कॉर्पोरेट मुनाफे पर सीधा असर पड़ सकता है। इसी डर से विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने अपनी पोजीशन हल्की करनी शुरू कर दी।
मिडकैप, स्मॉलकैप और दिग्गज शेयरों में मुनाफावसूली
बाजार में मंदी केवल मुख्य सूचकांकों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। इंट्राडे कारोबार के दौरान निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स दोनों में लगभग एक-एक प्रतिशत की गिरावट देखी गई। यह संकेत देता है कि व्यापक बाजार में निवेशकों का जोखिम उठाने का रुझान कमजोर पड़ रहा है। अधिक वैल्यूएशन वाले ग्रोथ शेयरों में तेज मुनाफावसूली देखने को मिली। फ्रंटलाइन शेयरों में बजाज फाइनेंस 5 प्रतिशत से अधिक गिरकर सेंसेक्स का सबसे कमजोर शेयर साबित हुआ। इसके साथ ही एक्सिस बैंक और बजाज फिनसर्व में भी 3 से 4 प्रतिशत तक की कमजोरी आई। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, एल एंड टी, कोटक महिंद्रा बैंक, एशियन पेंट्स, ट्रेंट, इंडिगो और अडानी पोर्ट्स जैसे भारी भरकम शेयरों में भी 1 से 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
पीबी फिनटेक के शेयरों में ऐतिहासिक गिरावट की वजह
आज के कारोबारी सत्र में सबसे ज्यादा चर्चा पॉलिसीबाजार की मूल कंपनी पीबी फिनटेक (PB Fintech) के शेयरों की रही। कंपनी के शेयर 35 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर 1,210 रुपये के निचले स्तर पर बंद हुए। इस तेज गिरावट का मुख्य कारण बीमा नियामक आईआरडीएआई (IRDAI) का एक नया नियामक प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव के लागू होने पर बीमा वितरण करने वाली ऑनलाइन और ऑफलाइन एग्रीगेटर कंपनियों की कमीशन संरचना और राजस्व में बड़ी कटौती होने की संभावना है। नियामक बदलावों से कंपनी के भविष्य के मुनाफे और नकदी प्रवाह पर संभावित नकारात्मक असर को देखते हुए बड़े ब्रोकरेज हाउस और निवेशकों ने इसमें भारी बिकवाली की, जिससे स्टॉक तकनीकी रूप से क्रैश कर गया।

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