मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और आयोग के प्रशासनिक कामकाज को लेकर हाल में उठे सवालों पर भारत निर्वाचन आयोग ने एक उच्चस्तरीय बैठक कर स्थिति स्पष्ट की है। निर्वाचन सदन में मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की उपस्थिति में हुई इस बैठक में मतदाता सत्यापन प्रक्रिया को सुगम बनाने के निर्देश दिए गए। साथ ही, तकनीकी प्रणालियों की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए। इसके साथ ही प्रशासनिक विषयों पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया गया।
कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र पर आयोग की सफाई
आयोग ने कैबिनेट सचिव को लिखे गए पत्र के संदर्भ में स्पष्ट किया कि यह पत्राचार आयोग अथवा आईटी प्रभाग के किसी नीतिगत विषय से संबंधित नहीं था। बल्कि, यह प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की कार्यप्रणाली से जुड़ा था। आयोग के अनुसार, संबंधित अधिकारी द्वारा जारी कार्य-विभाजन आदेशों को दो आयुक्तों के निर्देशों के बाद प्रभावी नहीं किया गया था। वहीं, आईटी प्रभाग की प्रशासनिक निगरानी का अधिकार कभी वापस नहीं लिया गया था। आयोग ने कहा कि उसके सभी महत्वपूर्ण फैसले विचार-विमर्श और सर्वसम्मति की स्थापित प्रक्रिया के तहत ही लिए जाते हैं।
छूटे नामों के सत्यापन के लिए घर-घर जाएंगे BLO
मतदाताओं की सुविधा के लिए आयोग ने निर्देश दिया है कि वर्तमान में जारी पुनरीक्षण के दौरान जिन नागरिकों को अनमैप्ड होने या तार्किक विसंगतियों के चलते नोटिस प्राप्त हुए हैं, उन्हें व्यक्तिगत रूप से कार्यालयों में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके बजाय, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) स्वयं ऐसे व्यक्तियों के पते पर जाकर आवश्यक प्रपत्र व दस्तावेज एकत्र करेंगे। फिर वे उन्हें निर्णय हेतु संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के समक्ष डिजिटल माध्यम से प्रस्तुत करेंगे।
केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही सुनवाई का प्रावधान रखा जाएगा। इसे प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन संचालित किया जाएगा। साथ ही जिला निर्वाचन अधिकारियों को रैन बसेरों, श्रमिक बस्तियों और कमजोर वर्गों के लिए पर्याप्त संख्या में सहायता केंद्र व विशेष शिविर स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
ECINet की समीक्षा के लिए बनेगी विशेषज्ञ समिति
तकनीकी ढांचे और डेटा सुरक्षा को लेकर आयोग ने स्पष्ट किया कि फील्ड स्तर के अधिकारियों को वैधानिक शक्तियों के अनुरूप ही सिस्टम का रोल-बेस्ड एक्सेस दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, निर्वाचन प्रणाली के नियमों व अधिनियमों के अनुपालन को परखने के लिए एक वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति में प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान (IIT/IIIT) के स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। यह समिति समग्र व्यवस्था की समीक्षा करेगी और अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
राज्यों में दावे-आपत्तियों की समय-सीमा विस्तारित
विभिन्न राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) से प्राप्त अनुरोधों के आधार पर आयोग ने संबंधित क्षेत्रों में दावे और आपत्तियां प्रस्तुत करने तथा उनके निस्तारण की समय-सीमा को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। वहीं, जिन क्षेत्रों में पुनरीक्षण का प्राथमिक चरण पूर्ण हो चुका है, वहां निरंतर अद्यतनीकरण (Continuous Updation) के तहत पात्र नागरिकों के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है।

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