झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को बड़ा एलान किया। सीएम सोरेन ने टीडीपीएल के संचालन में हुईं जेपीएससी-14 और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया। साथ ही जेपीएससी 11 से 13 तक की जांच कराने की बात भी कही गई।
इसके साथ ही इन परीक्षाओं के प्रकाशित रिजल्ट को भी रद्द करने का एलान किया गया। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि टीडीपीएल के जरिए जिन अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, उन सभी का चयन रद्द कर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री की घोषणा मोबाइल पर लाइव सुन रहे छात्र, जो जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बैठे थे, खुशी से झूम उठे। छात्रों ने एक-दूसरे को मिठाइयां बांटीं, गुलाल लगाया और धरनास्थल से अलबर्ट एक्का चौक तक यात्रा निकाली। हालांकि स्टूडेंट लीडर देवेंद्रनाथ महतो ने साफ किया कि रिफॉर्म की प्रक्रिया के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
दिनभर चली अटकलें, फिर आया फैसला
इससे पहले सोमवार को दिनभर अटकलों का बाजार गर्म रहा। छात्रों और चार सदस्यीय मंत्रिमंडलीय समूह के बीच दोपहर 2 बजे बैठक होनी थी। मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में मीडिया का जमावड़ा लग गया, लेकिन शाम 4 बजे तक बातचीत शुरू नहीं हो सकी।
बाद में पता चला कि सीएम हेमंत सोरेन धुर्वा स्थित सचिवालय में सभी 11 मंत्रियों के साथ इसी मुद्दे पर अहम बैठक कर रहे हैं। करीब साढ़े चार घंटे चली इस बैठक के बाद सीएम मीडिया के सामने आए और घोषणा की।
सीएम ने बताया कि परीक्षाएं कैसे होनी चाहिए, इसके लिए पहले से एसओपी बना हुआ है, और अगर उसका पालन हुआ होता तो ये गड़बड़ियां नहीं होतीं।
किन परीक्षाओं पर पड़ा असर
सीएम की घोषणा के मुताबिक जिन परीक्षाओं को रद्द किया गया है, उनमें 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा रेगुलर पीटी, जेपीएससी बैकलॉग पीटी 2023, जेपीएससी बैकलॉग पीटी 2025, फॉरेस्ट रेंज अफसर, सहायक वन संरक्षक, एपीपी रेगुलर नियुक्ति, एपीपी बैकलॉग नियुक्ति और सिविल जज जूनियर शामिल हैं। इन सभी परीक्षाओं का संचालन जेपीएससी के माध्यम से होता है।
इसके अलावा सीजीएल परीक्षा से चयनित 1975 लोगों की नौकरी अब खत्म हो जाएगी। साल 2014 के बाद हुई सभी नियुक्ति परीक्षाओं की जांच होगी। जेपीएससी और सीजीएल परीक्षा की जांच न्यायिक आयोग भी करेगा, और रिफॉर्म्स के लिए आईएएस अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाएगी।
धरना अब भी जारी
सीएम की घोषणा के बाद छात्रों का कहना है कि यह उनकी पहले चरण की मांग पूरी हुई है, लेकिन सीबीआई जांच होने तक आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल छात्र नेता पीयूष कुमार के मुताबिक अब भी कुछ मांगें पूरी नहीं हुई हैं। पहली मांग जेएसएससी-सीजीएल रद्द करने संबंधी अधियाचना वापस लेने से जुड़ी है, जो अब तक नहीं हुई। दूसरी मांग जेपीएससी 11 से 13 को लेकर सरकार के रुख की स्पष्टता से जुड़ी है, क्योंकि इन परीक्षाओं का इंटरव्यू और मेरिट लिस्ट भी टीडीपीएल कंपनी के जरिए ही जारी हुए थे।
छात्रों का यह भी कहना है कि तय कार्यक्रम के बावजूद मंत्रियों के समूह ने उनके साथ बातचीत नहीं की, इसीलिए वे अब भी बातचीत के लिए तैयार हैं। छात्रों की एकजुट राय है कि जब तक सीबीआई जांच की मांग और उनकी बाकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे धरने पर डटे रहेंगे और आंदोलन कमजोर नहीं पड़ेगा।
वहीं सदर अस्पताल में अनशन के दौरान इलाज करा रहे छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने अपना अनशन खत्म करने का ऐलान किया, हालांकि उन्होंने भी संघर्ष जारी रहने की बात दोहराई।
जो पास हो गए थे, वो भी बैठे धरने पर
देर शाम जब सीएम परीक्षा रद्द होने की घोषणा कर रहे थे, ठीक उसी वक्त और उसी जगह, यानी सचिवालय परिसर में उन लोगों की भीड़ जमा हो गई जो जेएसएससी के जरिए इन परीक्षाओं में पास होकर पहले ही नौकरी पा चुके थे।
रांची जिले के बुढ़मू प्रखंड में कल्याण पदाधिकारी के पद पर तैनात सत्यम कुमार को जैसे ही सरकार के फैसले की सूचना मिली, वे तुरंत सचिवालय पहुंचे। उनका कहना है कि इस तरह अचानक बयान देकर 2000 लोगों की नौकरी नहीं छीनी जा सकती, जबकि उन्हें कोर्ट के आदेश के बाद नौकरी मिली थी।
सत्यम के मुताबिक उनकी जिंदगी अब मुश्किल में पड़ गई है। हाल ही में उन्होंने बाइक, फोन और घर का सामान किस्तों पर लिया था। कुल 55 हजार रुपये की सैलरी में से 12 हजार रुपये हर महीने किस्त में कट रहे थे। उनका कहना है कि सरकार भले जांच करे, उन्हें कोई आपत्ति नहीं, लेकिन इस तरह अचानक नौकरी से नहीं निकाला जा सकता।
सत्यम के बैचमेट और प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी ऋषभ कुमार राय भी इसी हालात से गुजर रहे हैं। वे पिछले कई दिनों से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लॉ एंड ऑर्डर की ड्यूटी में तैनात थे, लेकिन अब उनकी नौकरी भी खत्म हो गई। उनका मानना है कि सरकार सभी की जांच करे और जो दोषी पाए जाएं, उन्हें ही हटाए, बाकी सबको एक साथ सजा देना ठीक नहीं। उनके मुताबिक यह फैसला भीड़ के दबाव में लिया गया है।
ऋषभ के मुताबिक उनके जैसे 500 से ज्यादा लोग भारी बारिश के बीच सचिवालय परिसर में धरने पर बैठे हैं, और कुल 2000 लोग इसमें शामिल होने वाले हैं। उनका कहना है कि जहां वे रातभर जाग रहे हैं, वहीं उनके घरवालों का हाल रो-रोकर बुरा हो गया है।
कानूनी पक्ष पर भी उठे सवाल
इस पूरे मसले पर राज्य के पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार ने मीडिया को बताया कि सीजीएल के तहत जो नियुक्तियां रद्द की गई हैं, वे शुरू से ही सशर्त थीं। उनके मुताबिक अभ्यर्थियों के नियुक्ति पत्र में पहले से ही लिखा था कि सीआईडी जांच के अंतिम निर्णय से उनकी नियुक्तियां प्रभावित हो सकती हैं, इसलिए इसमें किसी कानूनी अड़चन की आशंका नहीं है।
पहले राज्य सरकार को एक मोर्चे पर छात्रों के विरोध का सामना करना पड़ रहा था, अब उसे दो मोर्चों पर निपटना होगा। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बड़ी संख्या में छात्र अबीर-गुलाल लगाकर जश्न मना रहे हैं। लेकिन साथ ही कई लोगों के मन में यह सवाल भी है कि जिनकी नौकरी गई है, उन पर क्या बीत रही होगी। आंदोलन में शामिल कुछ लोग अपने उन दोस्तों से बात तक नहीं कर पा रहे, जिनकी नौकरी इस फैसले से चली गई।
इधर सचिवालय परिसर में धरना दे रहे पूर्व अधिकारियों को मंगलवार सुबह परिसर से बाहर कर दिया गया। साथ ही सचिवालय के मुख्य द्वार का गेट भी बंद कर दिया गया है। मूसलाधार बारिश के बीच ये लोग अब सड़क पर ही आंदोलन जारी रखे हुए हैं।

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